राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव,  दुमका

जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता

जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता

जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता बना लोगों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र

 दिया गया है प्रतियोगिता का रुप

150से अधिक कलादल दे रहें हैं प्रस्तुति

संताल परगना के सांस्कृतिक वैभव और सामाजिक समरसता का प्रतीक हिजला मेला में आने वाले दर्शकों की तादाद दिनानुदिन बढ़ती जा रही है ।प्रत्येक वर्ष की भाँति मेला में देखने और खरीदने को वह सबकुछ उपलब्ध है जो गत वर्षों में भी उपलब्ध था ।मेले को भव्य और आकर्षक रुप देने के लिए दुमका के वर्तमान अनुमंडल पदाधिकारी सह सचिव राजकीय जनजातीय हिजला मेला राकेश कुमार ने कई अभिनव प्रयोग किये हैं ।जनजातीय लोकजीवन से जुड़े जनजातीय नृत्य की प्रतियोगिता इनमें से एक है ।ऐसा नहीं है कि विगत वर्षों के दौरान यह नृत्य मेला में नहीं होता था ।परन्तु पिछले वर्ष से इसे प्रतियोगिता का रुप दिये जाने से मेला घूमने आने वाले तमाम दर्शकों को रंग बिरंगे पारम्परिक परिधान में सजे जनजातीय नर्तक और नृत्यांगनाओं के नृत्य बरबस ध्यान आकर्षित कर थिरकने को बाध्य करते हैं ।जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता में कई नृत्य विधाओं को शामिल किया गया है ,जिसमें विलुप्त हो रहे होली के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य बाहा ,सोहराय के समय किया जाने वाला नृत्य गोलबारी तथा बच्चों के जन्म के छठे दिन किया जाने वाला नृत्य छठिहार नृत्य अनिवार्य है ।प्रतियोगिता में महिलायें बंदना पर्व में किया जाने वाला नृत्य सोहराय, शादी विवाह के अवसर पर किया जानेवाला नृत्य दोंग,साल में किसी भी दिन किया जाने वाला नृत्य लंगड़े,बाहा पूजा के समय पूजा स्थल जाते समय किया जाने वाला नृत्य दहाड़ ,सोहराय के समय एक गली से दूसरे गली जाते समय किया जाने वाला नृत्य दुरुंजा नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं वहीं पुरुष नर्तक दुर्गापूजा के अवसर पर किया जानेवाला नृत्य दशाय,शादी ब्याह के अवसर पर आयोजित नृत्य पायका तथा कराम पूजा के समय पंडित के कथा सुनाने के बाद किया जानेवाला नृत्य कराम देख लोग आनंदविभोर हो रहे हैं ।
22 फरवरी तक चलने वाले इस नृत्य प्रतियोगिता में निर्णायक के रुप में रुबी बेसरा, प्रेमलता हेम्ब्रम, झुमरी सोरेन, बबीता मुर्मू,दिगम्बर मरांडी,संतलाल मरांडी, परमेश्वर मुर्मू, आलेश हाँसदा, मानवेल सोरेन, सुलेमान हाँसदा आदि शामिल हैं ।